Tuesday, January 17, 2017

फिर नंदीग्राम,दीदी की पुलिस ने किसानों पर बरसायीं गोली! छात्र सड़क पर उतरे तो उन्हें माओवादी घोषित करके गिरफ्तारी का फरमान जारी कर दिया मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नेऍ নির্বিচারে চললো গুলি ভাঙড়ে। গুলিতে বিদ্ধ হলো তিনজন। দুজন গুরুতর আহত, একজন মৃত। আঘাত আসছে একের পর এক। পাল্টা আঘাত ফেরাবে মানুষ। লড়াই চলছে। #এই_মুহুর্তে_ভাঙড় पलाश विश्वास

फिर नंदीग्राम,दीदी की पुलिस ने किसानों पर बरसायीं गोली!

छात्र सड़क पर उतरे तो उन्हें माओवादी घोषित करके गिरफ्तारी का फरमान जारी कर दिया मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नेऍ

নির্বিচারে চললো গুলি ভাঙড়ে। গুলিতে বিদ্ধ হলো তিনজন। দুজন গুরুতর আহত, একজন মৃত। আঘাত আসছে একের পর এক। পাল্টা আঘাত ফেরাবে মানুষ। লড়াই চলছে।

#এই_মুহুর্তে_ভাঙড়

पलाश विश्वास

नंदीग्राम - विकिपीडिया

https://hi.wikipedia.org/wiki/नंदीग्राम

भारत के स्वतंत्र होने के बाद, नंदीग्राम एक शिक्षण-केन्द्र रहा था और इसने कलकत्ता (कोलकाता) के उपग्रह शहर हल्दिया के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई. हल्दिया के लिए ताज़ी सब्जियां, चावल और मछली की आपूर्ति नंदीग्राम से की जाती है।

इतिहास · ‎नंदीग्राम के निवासी · ‎राजनीति

नंदीग्राम नरसंहार - यूट्यूब

▶ 29:09

https://www.youtube.com/watch?v=54EdRcLxxeM

23/07/2012 - Reyazul Haque द्वारानंदीग्राम के लिए वीडियो अपलोड किया गया

इस फिल्म में peasents 14 मार्च हत्याओं का मूल वीडियो फुटेज के आधार पर किया जाता है,नंदीग्राम, पश्चिम बंगाल। सीपीएम, एक बाएं पार्टी की सरकार थी के लिए ...



मां माटी मानुष की सरकार बनी नंदीग्राम और सिगुर में जमीन आंदोलन के खिलाफ जनप्रतिरोध का ज्वालामुखी फूटने की वजह से।नंदीग्राम के मुसलमान बहुल इलाके में जबरन जमीनअधिग्रहण के नतीजतन मुसलमान वोटबैंक ने एकमुश्त वामपक्ष छोड़कर ममता दीदी की ताजपोशी कर दी।

आदरणीया महाश्वेता देवी के नेतृत्व में साहित्यकारों, कवियों, रंगकर्मियों,कलाकारों और बुद्धिजीवियों का भद्रसमाज फिल्मी सितारों के साथ दीदी के साथ हुआ तो बंगाल में भारी बहुमत से जीतकर सत्ता में आयी बुद्धदेव भट्टाचार्य की सरकार को अंधाधुंध शहरीकरण और औद्योगीकरण के लिए,पूंजीपतियों के हितों के मुताबिक जबरन भूमि अधिग्रहण की कीमत चुकानी पड़ गयी और 35 साल के वाम शासन का पटाक्षेप हो गया।

दीदी के राजकाज में भूमि अधिग्रहण का काम अबतक रुका हुआ था।तैयारी बहुत पहले से थी।नंदीग्राम इलाके में भी भूमि अधिग्रहण की तैयारी थी।लेकिन नये कोलकाता के पास दक्षिण 24 परगना के भांगड़ में पावरग्रिड के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन के दमन के लिए दीदी ने अचानक सत्ता की पूरी ताकत झोंक दी है।

गौरतलब है कि  नया कोलकाता बसाने के लिए भी भारी पैमाने पर जमीन अधिग्रहण हुआ।वह स्थगित आंदोलन भी ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ा है,जिसे छात्रों युवाओं का भारी समर्थन है।

नंदीग्राम नरसंहार के करीब एक दशक बाद फिर बंगाल में जमीन अधिग्रहण के लिए पुलिस ने गोली चला दी।बंगाल के यादवपुर विश्विद्यालय समेत तमाम विश्वविद्यालयों के छात्र आंदोलनकारियों के समर्थन में हैं और कोलकाता की सड़कों पर छात्र उतरने लगे हैं.जिन्हें मुख्यमंत्री ने माओवादी करार दिया है।

अंधाधुंध पुलिसिया चांदमारी में तीन ग्रामीणों को गोली लगी है,जिनमें से एक की मौत हो गयी है।तीन लोगों की हालत गंभीर है।

माकपा छोड़कर दीदी की सरकार में कैबिनेट मंत्री माकपाई किसान सभा के पर्व राष्ट्रीय नेता  रेज्जाक अली मोल्ला के गृहक्षेत्र में किसानों के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन केखिलाफ सत्ता के तौर तरीके अब भी वे ही हैं,जो वाम शासन के ट्रेडमार्क रहे हैं।कुल 21 गावों के किसान मोर्चाबंद हैं।गांवों ,खेतों और सड़कों में मोर्चाबंदी है।

दीदी ने मोल्ला को आंदोलन से निबटने की जिम्मेदारी सौंपी थी लेकिन अब किसान उनके साथ नहीं हैं।किसान उसीतरह विरोध कर रहे हैं जैसे उन्होंने नंदीग्राम और सिंगुर में किया है।

करीब चालीस हजार किसानों के जमावड़े से निबटने के लिए दीदी की पुलिस ने गोली चला  दी और अब आंदोलन का समर्थन कर रहे तमाम छात्रों को माओवादी घोषित करके उन्हें गिरफ्तार करने का उन्होंने फरमान भी जारी कर दिया है।

किसानों  का आरोप है कि पॉवर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (PGCIL) के प्रोजेक्ट के लिए 16 एकड़ कृषि भूमि का 'जबरन' अधिग्रहण किया गया है।खेतों से इलेक्ट्रिक लािन कनेक्ट करने का आरोप भी है,जिससे खेतों में न जाने की वजह से किसानों में भारी गुस्सा फैल गया है और वे किसीकी सुन नहीं रहे हैं।

गौरतलब है कि नंदीग्राम की तरह यह इलाका भी मुसलमानबहुल है।

अबाध कारपोरेट पूंजी के ​दूसरे चरण के आर्थिक सुधारों का एजंडा राजनीतिक बवंडर के बावजूद खूब अमल में है। शहरों और कस्बों तक बाजार का विस्तार का मुख्य लक्ष्य हासिल होने के करीब है, जिसके लिए सरकारी खर्च बढ़ाकर सामाजिक सेक्टर में निवेश के जरिए ग्रामीणों की खरीद क्षमता बढ़ाने पर सरकार और नीति निर्धारकों का जोर रहा है।

नोटबंदी से तहस नहस अर्थव्यवस्था और उत्पादन प्रणाली के मद्देनजर साफ है कि अर्थ व्यवस्था पटरी पर लाना प्रथमिकता है ही नहीं। होती तो वित्तीय और मौद्रक नीतियों को दुरुस्त किया​ ​ जाता। खेती और देहात को तबाह करके बाजार का विस्तार ही सर्वोच्च प्राथमिकता है।

विडंबना यह है कि नोटबंदी के खिलाफ का चेहरा बनकर दीदी प्रधानमंत्री को तानाशाह कहकर रोज नये सिरे से जिहाद का ऐलान करके खुद जनवादी होने का दावा कर रही है तो दूसरी ओर उनके ये तानाशाह अंदाज हैं।हाथी के दांत खाने के और,दिखाने के और होते हैं,साफ जाहिर है।

आज दिनभर भांगड़ अग्निगर्भ रहा है।ममता दीदी जिन महाश्वेता देवी को अपनी कैली में उनकी मौजूदगी में जनआंदोलनों की जननी कहती रही हैं,जल जंगल जमीन के हकहकूक पर केंद्रित उनका मशहूर उपन्यास का शीर्षक भी अग्निगर्भ है।वहां कई दिनों से आंदोलनकारियों और सत्ता दल के कैडरों में मुठभेड़ का सिलसिला चला है।

बाहुबल से जब जनांदलोन रोका न जा सका,तो मां माटी मानुष की सत्ता ने पुलिस और रैफ के जवानों को मैदान में उतार दिये।नतीजतन नया कोलकाता से सटे तमाम गांवों में आग सी लग गयी है।दक्षिण 24 परगना जिले के इस इलाके में  पॉवर सब स्टेशन प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे ग्रामीणों का पुलिस के साथ यह हिंसक टकराव हुआ। दक्षिण 24 परगना के भांगड़ में 21 गांवों के लैंड ऐक्टिविस्ट ने पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन के खिलाफ सोमवार को धरना प्रदर्शन किया।

इलाके में उस वक्त हिंसा भड़क गई जब पुलिस ने भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे 2 कार्यकर्ताओं गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद ट्रैफिक रोकने के लिए स्थानीय लोगों ने लकड़ी के बड़े-बड़े टुकड़ों और बालू की बोरियों का इस्तेमाल कर सड़क को जाम कर दिया।

हालांकि बाद में गिरफ्तार किए गए दोनों कार्यकर्ताओं को छोड़ दिया गया। लेकिन प्रशासन का कहना है कि भांगड़ में चल रहा प्रॉजेक्ट का काम तब तक बंद रहेगा जब तक झगड़ा सुलझ नहीं जाता। सरकार के इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों और जमीन के कार्यकर्ताओं ने अपनी जीत की एक रैली निकालने की कोशिश की जिसे पुलिस ने रोक दिया। नतीजतन इलाके में एक बार फिर हिंसा भड़क गई और वहां RAF यानी रैपिड ऐक्शन फोर्स की तैनाती करनी पड़ी।

गौरतलब है कि PGCIL की ओर से राजरहाट में 400/220KV के गैस संचालित सब स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है। ये 953 किलोमीटर हाईवोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन का हिस्सा है जिसके जरिए सरकार का दावा है कि पश्चिम बंगाल के फरक्का से बिहार के कहलगांव तक पॉवर की आपूर्ति होगी।

जीवन जीविका परिवेश बचाओ मंच के तहत नया साल शुरू होने के साथ ही क्षेत्र में किसान जमीन अधिग्रहण के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।उन्हें छात्रों का पूरा समर्थन है।

नाराज ग्रामीणों का कहना है कि जमीन को जबरन छीना गया है। साथ ही प्रोजेक्ट से स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य को भी बड़ा खतरा है.

किसानों का साफ दो टुक कहना है, 'ममता बनर्जी ने वादा किया था कि कोई भी जमीन जबरन अधिग्रहीत नहीं की जाएगी। लेकिन आज उनकी पार्टी के व्यक्ति बंदूक की नोक पर हमारी जमीन छीन रहे हैं और वे मुंह बंद किए बैठी हैं।'हालांकि वे चुप कतई नहीं है और उन्होंने आंदोलन के समर्थन में खड़े तमाम छात्रों को माओवादी करार देकर उन्हें गिरफ्तार करने का फरमान जारी कर दिया है।इन छात्रों में जयादवपुर विश्वविद्यालय के वे छात्र भी हैं,जो मनुस्मृति दहन कर रहे थे और रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या के खिलाफ जाति उन्मूलन का नारा लगा रहे थे।ये छात्र ही होक कलरव आंदोलन चला रहे थे।

तब संघ परिवार और भाजपा ने इन छात्रों को राष्ट्रविरोधी और माओवादी कहा था।वे यादवपुर विश्वविद्यालय में घुसकर हमला कर रहे थे।अब वे ही छात्र जब किसानों के हरकहकूक की लड़ाी में शामिल हैं तो लालकृष्ण आडवानी,जेटली या राजनात सिंह को मोदी के बदले प्रधानमंत्री बनाने की अपील करने वाली देश दुनिया में किसानों के लिए मर मिट जानेवाली हमारी दीदी मनुस्मृति विरोधी उन्हीं छात्रों को माओवादी करार देकर उनकी गिरफ्तारी का हुकक्मनामा जारी कर रही हैं।

इसी बीच पश्चिम बंगाल के ऊर्जा मंत्री और मशहूरट्रेड यूनियन नेता शोभनदेब चटर्जी ने मंगलवार को दोहराया कि राज्य सरकार ग्रामीणों की मांग के अनुरूप प्रोजेक्ट साइट पर काम बंद कराने के निर्देश पहले ही जारी कर चुकी है।वे ताज्जुब इस बात पर जता रहे हैं कि काम बंद है तो आंदोलन फिर क्यों हो रहा है।किसानों के किलाफ मोर्चाबंद कैडरों ,पुलिस औररैफ की भूमिका पर वे खामोश हैं उसीतरह जैसे जूटमिलों और चायबागानों के बंद होने पर उनकी सत्तानत्थी यूनियनों के होंठ फेवीकाल और यूकोप्लास्ट से बंदहै। बहरहाल मंत्री मजदूर नेता चटर्जी ने कहा, 'मैं आश्वस्त हूं कि अगर कोई तार्किक शिकायतें हैं तो हम मुद्दे का समाधान शांतिपूर्वक ढूंढ लेंगे। लेकिन अगर कोई अनावश्यक तौर पर हिंसा को हवा देना चाहते हैं तो हम असहाय है।'

इससे पहले इस महीने के शुरू में नाराज ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस से टकराव हुआ था। तब जिला प्रशासन ने नाराज ग्रामीणों के साथ आपातकालीन बैठक कर इस मुद्दे पर मकर सक्रांति के बाद समाधान ढूंढने का वायदा किया था। इसके उल्टे  मंगलवार सुबह फिर जब सीआईडी ने एक किसान कार्यकर्ता को बीती रात हुए प्रदर्शन की वजह से पकड़ा तो किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। 21 गांवों के करीब चालीस हजार किसानों  ने श्यामनगर-हड़ोआ मार्ग पर जाम लगा कर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।

पुलिस और RAF के बड़े दस्ते को जाम हटाने के लिए मौके पर भेजा गया तो प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया।प्रदर्शनकारियों ने कुछ वाहनों में तोड़फोड़ की और एक वाहन में आग लगा दी। ग्रामीणों के हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस को गांव से लौटने को मजबूर होना पड़ा।

पुलिस के मुताबिक भीड़ पर नियंत्रण पाने के लिए लाठी-चार्ज और आंसूगैस के गोलों का सहारा लेना पड़ा,पिर पुलिस ने गोली भी चला दी।

इसके विपरीतदावा यह है कि ममता बनर्जी ने प्रशासन को किसी भी सूरत में फायरिंग नहीं करने के निर्देश दिए हैं। ममता बनर्जी ने ये भी कहा है कि अगर लोग जमीन नहीं देना चाहते तो कोई जमीन अधिगृहीत नहीं की जाएगी। अगर जरूरत पड़ी तो पॉवर प्रोजेक्ट को दूसरी जगह पर शिफ्ट कर दिया जाएगा।

इस बीच, PGCIL ने प्रोजेक्ट पर काम रोक दिया है।

सरकार का कहना है कि प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद राज्य प्रशासन ने पुलिस को क्षेत्र से हटाने का फैसला किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्थानीय विधायक और मंत्री रज्जाक मोल्ला को स्थिति को शांत करने के लिए मौके पर भेजा है।

Prakkan Hillol

ভাঙড়ে আন্দোলনরত জনতার উপর চলল নির্বিচারে পুলিশের গুলি। গলায় গুলি লেগে শহিদ হোলেন আন্দোলনের সাথী আলমগির হোসেন। দুজন আরও জখম হোন। মেহনতি কৃষিজীবী মৎসজীবী মানুষের আন্দোলন কে দমাতে--- গুলি চালিয়ে, আরো র‍্যাফ মোতায়েম করে, কাঁদানে গ্যাস ছুঁড়ে, বাউন্সার ভাড়া করে কোনো প্রচেষ্টাই বাকি রাখছেনা তৃণমূলী প্রশাসন। কাল রাত থেকেই শুরু হয়েছে দানবীয় রাষ্ট্রীয় সন্ত্রাস। সরকারের ঘাতক বাহিনীর অত্যাচারে গ্রামে গ্রামে শিশু মহিলা বৃদ্ধ-বৃদ্ধাদের কেও ছাড়া হচ্ছে না।

আজ কলেজ স্কয়ারে ভাঙড়ে এই রাষ্ট্রীয় সন্ত্রাসের বিরুদ্ধে প্রতিবাদ স্বরূপ স্কয়াড মিছিল সংঘটিত করা হল।

#ভাঙড়_এই_মুহূর্তে

Image may contain: 1 person

Image may contain: one or more people

Image may contain: one or more people, shoes and outdoor

Image may contain: 2 people, people standing and outdoor


Sayan

ভাঙড়ে পুলিশি আক্রমণের বিরুদ্ধে আজ কলেজ স্ট্রীট চত্বরে রাস্তা অবরোধ করা হল।

See Translation

Image may contain: one or more people, people walking, crowd and outdoor

Image may contain: one or more people, people standing, basketball court, crowd and indoor

Image may contain: 1 person, standing and outdoor

Image may contain: 3 people, people standing, crowd and outdoor

Image may contain: 1 person, standing and outdoor

+15


Monday, January 16, 2017

बहुत तेजी से हमारे बच्चे इस मुक्तबाजार की चकाचौंध में आत्मध्वंस की तरफ बढ़ रहे हैं।


बहुत तेजी से हमारे बच्चे इस मुक्तबाजार की चकाचौंध में आत्मध्वंस की तरफ बढ़ रहे हैं।
पलाश विश्वास
बहुत तेजी से हमारे बच्चे इस मुक्तबाजार की चकाचौंध में आत्मध्वंस की तरफ बढ़ रहे हैं।
कल का दिन दुर्घटनाओं के नाम रहा।
कल सोदपुर में दो टीनएजरों की मोटरबाइक दुर्घटना में मौत की वजह सै जनजीवन स्तब्ध सा हो गया।
समाजसेवी रामू के इकलौते बेटे और उसके दोस्त की मौत से दिनभर अफरातफरी रही।
इसीलिए कल अक्षर प्र्व में 2006 में प्रकाशित अपनी कविता ईअभिमन्यु उन खोते हुे बच्चों की याद में पोस्ट करके खुद को सांत्वना सी दी।
इलाके का भूगोल बदल गया है।
कल उस शवयात्रा में सौ से ज्यादा उन बच्चों के दोस्त स्कार्पियो गाड़ियों के साथ श्मसान पर मौजूद थे।
संघर्षशील गरीब परिवारों के बच्चे नवधनाढ्य परिवारों की जीवन शैली में जैसे तेजी से अभ्यस्त हो रहै हैं।
कहना मुश्किल है कि अब शोक का समय किसके लिए भारी पड़ने वाला है।
इलाके का भूगोल सिरे से बदल गया है।
पुश्तैनी मकानों की जगह बहुमंजिली इमारतें खड़ी हो गयी है।
गली मोहल्ले में अजनबी चेहरों का हुजूम है।
अपने ही बच्चों से संवाद की स्थिति खत्म सी है।
बल्कि माहौल पीढ़ियों के दरम्यान अभूतपूर्व  शत्रुता का बन गया है।
स्मृतियां तेजी से खत्म हो रही है।
सपनों का कत्लेआम है।
हममें से हर कोई इस घनघोर संकट में अकेला ,निहत्था और असहाय है।
सारी क्रयशक्ति और डिजिटल कैसलैस इंडिया के सारे कालेधन से हम अपनी नई पीढ़ी को बचा  नहीं पा रहे हैं।
 और किसी को इसका अहसास नहीं है कि मां बाप की हमारी पीढ़ी कितनी बुरीतरह फेल है। 
बेहद भयानक समय है यह और दिलोदिमाग लहूलुहान है।
शंकर गुहा नियोगी के छत्तीसगढ़ संघर्ष और नवनिर्माण आंदोलन में नियोगी के साथी और बंगाल में शहीद अस्पताल की तर्ज पर श्रमजीवी अस्पताल चलाने वाले डा.पुण्यव्रत गुण की किताब का अनुवाद करने में लगा हूं।
रियल टाइम अपडेट में इसलिए निरंतरता है नहीं।
नोटबंदी में बेहिसाब नकदी सिर्फ पांच सौ करोड़ की निकली है तो यूपी में अबूझ पहेली है।
मौका लगा तो शाम तक जानारियां शेयर करने की कोशिश करुंगा।
जो भी प्रासंगिक लिंक मिलेगा,वह इस बीच शेयर करते जाउंगा।
हम तमाम जरुररी लिंक और प्रासंगिक कांटेट शेयर करें तो भी जानकारी मिलेगी जनता को,कृपया इस पर गौर करें।
बाकी नाकाबंदी और सेंसरशिप दोनों है।आपातकाल जारी है।
जीने के लिए दिहाड़ी बेहद जरुरी है।
-- 
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!
--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

प्रतिरोध की कहानियां


डा.अरविंद कुमार को धन्यवाद क्योंकि उन्होंने महतोष मोड़ आंदोलन पर लिखी और 1991 मेरी कहानी सागोरी मंडल अभी मंडल अभी जिंदा है,को अपने संकलन प्रतिरोध की कहानियां में हिंदी के तमाम दिग्गज और मेररे अत्यंत प्रिय कथाकारो की कहानियों के साथ शामिल किया है।मैंने करीब सोलह सत्रह साल से कोई कहानी नहीं लिखी है,हांलांकि शलभ श्रीराम सिंह की पहल पर मेरा दूसरा कहानी संग्रह ईश्वर की गलती  2001 में छपा है।मैंने अनछपी कहानियां या कविताएं किसी को इन सोलह सत्रह सालों में कहीं छपने के लिए भेजी नहीं है।
मरे लिे यह सुखद अचरज है कि कमसकम कुछ लोग कहानी कविता के सिसिले में मुझे अब भी याद करते हैंं।
अरविंद कुमार जी से पिछले दिनों लंबा गपशप हुआ था और तब भी उन्होंने मेरी कहानी का जिक्र नहीं किया था,अलबत्ता चुनिंदा कहानियों का संग्रह भेजने के लिए मेरा पता लिखवा लिया था।
सागोरी मंडल बांग्ला में अनूदित है।यह कहानी किन किन पत्रिकाओं में छपी है,मुझे अभी याद नहीं है।आदरणीय गीता गैरोला जी ने बीच में इस कहानी के बारे में पूछा था,जिसकी कोई प्रति मेरे पास नहीं है।हालांकि वह मेरे अंडे सेंते लोग कहानी संग्रह में छपी है।इसके अलावा सामाजिक यथार्थ की कहानियां जैसे शीर्षके के किसी संकलन में भी यह कहानी संकलित हुी है।उसकी प्रति भी मेरे पास नहीं है।
गीता जी ने बताया कि उत्तरा में यह कहानी छपी थी।मुझे नहीं मालूम है।बहरहाल उत्तरा में बंगाल की मौसी ट्रेनों पर एक कथा अक्टोपस उत्तरा में छपी थी,उसकी याद है।
इस संकलन में शामिल कहानीकारों में हमारे पुरातन मित्र संजीव की बेहतरीन कहानी ापरेशन जोनाकी भी है।पंकज बिष्ट की कहानी हल,विद्यासागर नौटियाल जी की कहानी भैंस का कट्या,मधुकर सिंह की दुश्मन,शिवमूर्ति की कहानी सिरी उपमा जोग,देवेंद्र सिह की कहानी कंपनी बहादुर,जयनंदन की कहानी विश्वबाजार का ऊंट,विजेंद्र अनिल की कहानी फर्ज,विजयकांत की कहानी राह,अवधेश प्रीत की कहानी नृशंस भी शामिल हैं।
उम्मीद है कि हिंदी के पाठकों को हिंदी कहानी का भूला बिसरा जमाना याद आयेगा।अरविंद जी का आभार।
प्रकाशक अनामिका पब्लिशर्स को धन्यवाद।
331 पेज की इस किताब की कीमत आठ सौ रुपये रखी गयी है।यह मुझे ठीक नहीं लग रहा है।
बांग्ला  में इतने पेज की किताब की कीमत ढाई सौ रुपये केआसपास होती है।कोई रचनासमग्प्रर भी किफायती दाम पर पाठको के लिए उपलब्काध है।प्रकाशक से सीधे लेने पर किताबब की कीमत दो सौ रुपये के आस पास बैठती है।बांग्ला और दूसरी भारतीय भाषाओं की किताबों की सरकारी खरीद नहीं होती,इसलिए वे पाठकों का ख्याल रखते हैं।मराठी,उड़िया और असमिया में भी किताबें पाठकों तक पहुंचाने की गरज होती है।
हम नहीं जानते कि इतनी महंगी किताबें कौन पढ़ेंगे।बहरहाल हमारी को चुनने के लिए आभारी जरुर हूं।
हो सकता है कि हिंदी में किताब छपने की लागत ज्यादा बैठती हो।अरसे बाद कोई कहानी छपी भी तो आम पाठकों तक पहुंचने की उम्मीद कम है।मेरे लिए यह अहसास सुखद नहीं है।
पलाश विश्वास
-- 
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!
--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

Sunday, January 15, 2017

Saradindu reports.half pant to Full pant with Ambedkar মঞ্চে অশোক, সাজাহান, নিবেদিতা, আম্বেদকরের ছবি বিশেষ প্রতিবেদন, শরদিন্দু উদ্দীপন :


Saradindu reports.half pant to Full pant with Ambedkar

মঞ্চে অশোক, সাজাহান, নিবেদিতা, আম্বেদকরের ছবি
বিশেষ প্রতিবেদন, শরদিন্দু উদ্দীপন : 
https://m.facebook.com/story.php…

হাপ প্যান্ট থেকে ফুল প্যান্টঃ 
কনুইয়ের কাছে ভাজ করা সাদা ফুলসার্ট, খাকী হাপপ্যান্ট, লম্বা কালোজুতো, চামড়ার বেল্ট, মাথায় খাকির টুপি আর হাতে লাঠি নিয়ে ১৯২৫ সালে শুরু হয়েছিল রাষ্ট্রীয় স্বয়ং সেবক সংঘের কুচকাওয়াজ। এদের ভাগুয়া নিশানে জায়গা পায় স্বস্তিক চিহ্ন। হিন্দু মহাসভা ভেঙ্গে ওই বছর তৈরি হয় এই সঙ্ঘ। শুরু থেকেই এদের দৃষ্টিভঙ্গিতে ছিল জঙ্গিপনা। আরএসএস এর প্রতিষ্ঠাতা কেশব বলিরাম হেজোয়ারের বিরুদ্ধে ছিল দেশদ্রোহিতার মামলা।
আরএসএস এর এই পোশাকে প্রথম পরিবর্তন আসে ১৯৩০ সালে। খাকী টুপির পরিবর্তে আসে হিটলারের অনুকরণে কালো টুপি। এদের কিংবদন্তী নেতা মাধব সদাশিব গোলোয়ারকার হিটলারের সঙ্গে দেখা করে জঙ্গিবাদে অনুপ্রাণিত হন এবং খোলাখুলি হিটলারের আর্য তত্ত্বকে সমর্থন করেন। গোলওয়ার্কর এবং আর এক কিংবদন্তী নেতা সাভারকর দুজনেই ছিলেন হিটলারের অন্ধ ভক্ত। সম্ভবত এই কারনেই হিটলারের কালো টুপি এবং স্বস্তিক চিহ্ন আরএসএস এর প্রতীক চিহ্ন হয়ে দাঁড়ায়।
১৯৭৩ সালে আবার পরিবর্তন আসে। ভারি চামড়ার জুতোর বদলে আসে হালকা এবং স্টাইলিশ জুতো। কিন্তু চামড়ার বেল্ট নিয়ে শুরু হয় প্রশ্ন। গোমাতার চামড়া যে! অহিংস আন্দোলনের পক্ষে পশুর চামড়া ঠিক মানান সই নয়। ফলে রাতারাতি পশুর চামড়ার বেল্টের বদলে আসে ক্যানভাসের মোটা বেল্ট।
এর পরে আবার পরিবর্তন। এই পরিবর্তন এল ২০১৬ সালের আগস্ট মাসে। পরিবর্তনটা বেশ বিপ্লবাত্মক। ৯১ বছর ধরে এই হাটুর উপরে হাপ প্যান্ট নব্যদের ঠিক মনপূত নয়। এতে নিজেকে কেমন একেবারে সেকেলে মনে হয়। নাগপুরের হেড অফিস নব্যদের কথা ভেবে বিষয়টিকে মেনে নিল।
গতকাল ১৪ই জানুয়ারী ২০১৭ এই নতুন ফুল প্যান্ট পরা আরএসএস ক্যাডারদের কুচকাওয়াজ দেখার সুজোগ পেল কোলকাতা। কিন্তু আরএসএস এর মঞ্চ শয্যায় এমন পরিবর্তনের আশা ঘুণাক্ষরেও করেননি কোলকাতাবাসি! তাদের মূল মঞ্চের ব্যানারে সম্রাট অশোক, সাজাহান, সিস্টার নিবেদিতা এবং বাবা সাহেব আম্বেদকর! হ্যা, আপনি যদি আরএসেসকে চেনেন তবে এই ছবি দেখে অন্তত বার দশেক চোখ কচলাতে হবে! ঠিক দেখছেন তো? মঞ্চের সামনে কেশব বলিরাম হেজোয়ার আর গোলোয়ারকার তো ঠিক আছে। নাথুরাম থাকলেও আপত্তি ছিল না, কিন্তু আম্বেদকর!!
হ্যা, এটাই আরএসএস এর পরিবর্তন। খাঁদির চরকাতে গান্ধীর পরিবর্তে নরেন্দ্র দামোদর দাস মোদি আর ওং ভারতমাতা এবং ভাগুয়া ধ্বজের সাথে অশোক, সাজাহান ও আম্বেদকর।
বন্ধুরা এই পরিবর্তন কি কাকতালীয়। আমরা জানি এটা হঠাৎ তাল পড়ার মত কোন বিষয় নয়। "গর্ব করে বল আমি হিন্দু" এই ছিল যাদের শ্লোগান তাদের এই রাতারাতি পরিবর্তন আসলে একটি রণকৌশল। এটা হিন্দুত্ববাদ এবং মনুবাদেরই পুনর্জাগরণ। আর সেই সাথে বাবা সাহেব আম্বেদকরকে হাইজ্যাক করে ভাগুয়া শিবিরের আইকন বানানোর ষড়যন্ত্র।
বিজেপির আড়াই বছরের শাসন কালকে মূল্যায়ন করলেই বুঝতে পারবেন এই পরিবর্তনটি আসলে একটি ধাঁধাঁ।
২০১৬ সালের ১৭ই জানুয়ারী রোহিত ভেমুলার প্রাতিষ্ঠানিক হত্যাকাণ্ডের পরে ঘোরতর বিপদে পড়ে গেছে ব্রাহ্মন্যবাদ। প্রমান হয়েছে তারা ভারত বিধ্বংসী বিষ। মুজাপফরনগর, দাদরি, উনা, কালাহান্ডি সর্বত্র চলছে ব্রাহ্মন্যবাদের বিরুদ্ধে প্রবল প্রতিরোধ। গো-রক্ষকদের নৃশংস ডাণ্ডাকেও ক্লান্ত করে ছেড়েছে দলিত-বহুজনের সার্বিক উত্থান। উনার ঘটনায় প্রতিবাদের ঝড় উঠেছে সর্বত্র। চর্মকার ভাইদের সমর্থনে এগিয়ে এসেছে দলিত মুসলিম ভাইয়েরা। তাদের সম্মিলিত বিপুল প্রতিরোধের কাছে নতিস্বীকার করে গদি ছাড়তে হয়েছে গুজরাটের মুখ্যমন্ত্রীকে। ভারতের প্রতি কোনে কোনে সংঘটিত হয়েছে দীপ্ত মিছিল। দেশের জনগণের মধ্যে সংহতির চেতনা জাগ্রত কারার জন্য জাতপাতের ভেদভাবকে উপেক্ষা করে মিছিলে মিলিত হয়েছে অগণিত মানুষ। তারা দীপ্ত ভাবে ঘোষণা করেছে ব্রাহ্মন্যবাদ নিপাত যাক, জাতপাত নিপাত যাক, মনুর শাসন ধ্বংস হোক। তারা হুঁশিয়ার করেছে সেই সব দাঙ্গাবাজদের যারা নিজের হাতে আইন তুলে নিয়ে ভারতীয় শাসনব্যবস্থাকে ভেঙ্গে ফেলার চক্রান্তে সামিল হয়েছে। তারা দাবী করেছে যে সব কাজের জন্য জাতপাত নির্ণয় করা হয় সেই কাজ আর তারা করবেনা। তারা দাবী করেছে সরকারকে তাদের প্রাপ্য জমি ফেরত দিতে হবে এবং সেই জমিতে খাদ্য উৎপাদন করে তারা মর্যাদার সাথে জীবনযাপন করবে।
দলিত-বহুজন মানুষেরা বুঝতে পেরেছেন যে বাবা সাহেবের Social inclusive doctrine বা ভাগিদারী দর্শনই ৮৫% মূলনিবাসী বহুজন সমাজকে কেন্দ্রীভূত করে তুলবে এবং এই ভাগিদারী সামাজিক শৈলী বহুজনদের রাষ্ট্র ক্ষমতার কেন্দ্র বিন্দুতে নিয়ে আসবে। স্বাধিকার এবং ভাগিদারীর সুষম বন্টন নিশ্চিত হলে শ্রেণি-সংগ্রামহীন, হিংসাশ্রয়ী রক্তরঞ্জিত যুদ্ধ ছাড়াই সংঘটিত হবে এক নিঃশব্দ রাষ্ট্র বিপ্লব। সর্বজনের কল্যাণে সর্বজনের রাষ্ট্রীয় উত্থান। এই রাষ্ট্রীয় উত্থানে হাপ প্যান্টের দর্শন সেকেলে হয়ে যাবে। তাই দলিত বহুজনের চোখের সামনে বাবা সাহেবের ছবির প্রলেপ লাগিয়ে ভাগুয়া ধ্বজ ওড়াতে চাইছে আরএসএস।

Image may contain: sky and outdoor

-- 

Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!
--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

Saturday, January 14, 2017

तस्वीर को लेकर हंगामा बरपा है कत्लेआम से बेपरवाह सियासत है असल मकसद संविधान के बदले मनुस्मृति विधान लागू करने का है! संभव है कि भीम ऐप के बाद शायद नोट पर गांधी को हटाकर मोदी के बजाय बाबासाहेब की तस्वीर लगा दी जाये! पलाश विश्वास

तस्वीर को लेकर हंगामा बरपा है

कत्लेआम से बेपरवाह सियासत है

असल मकसद संविधान के बदले मनुस्मृति विधान लागू करने का है!

संभव है कि भीम ऐप के बाद शायद नोट पर गांधी को हटाकर मोदी के बजाय बाबासाहेब की तस्वीर लगा दी जाये!

पलाश विश्वास

याद करें कि नोटबंदी की शुरुआत में ही हमने लिखा था कि नोटबंदी का मकसद नोट से गांधी और अशोक चक्र हटाना है।

हमारे हिसाब से आता जाता कुछ नहीं है।गांधी की तस्वीर को लेकर जो तीखी प्रतिक्रिया आ रही हैं,जनविरोधी नीतियों के बारे में कोई प्रतिक्रिया सिरे से गायब है।

तस्वीर को लेकर हंगामा बरपा है

कत्लेआम से बेपरवाह सियासत है

बैंक से कैश निकालने पर टैक्स लगाने की योजना नोटबंदी का अगला कैसलैस डिजिटल चरण है जबकि ट्रंप सुनामी से तकनीक का हवा हवाई किला ध्वस्त होने को है।इसके साथ ही तमाम कार्ड खारिज करके आधार पहचान के जरिये लेनदेन लागू करने का तुगलकी फरमान है,जिसपर राजनीति आधार योजना सन्नाटा दोहरा रही है।

सीएनबीसी-आवाज़ को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम को लागू करने में आ रही बड़ी अड़चन दूर हो गई है। आधार बेस्ड फिंगर प्रिंट स्कैनर के जरिये पेमेंट लेने वाले व्यापारियों को 0.25-1 फीसदी तक का कमीशन मिलेगा। यूआईडीएआई के मुताबिक आधार बेस्ड ट्रांजैक्शन अपनाने के लिए दुकानदारों को कोई चार्ज नहीं देना पड़ेगा, ना ही उन्हें पीओएस मशीन का खर्च लगेगा।सूत्रों के मुताबिक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईडीएफसी बैंक और इंडसइंड बैंक ने आधार पर आधारित पेमेंट सिस्टम तैयार कर लिया है जबकि आईसीआईसीआई बैंक और पीएनबी समेत 11 और बैंक भी इसकी तैयारी में लगे हैं। आधार सिस्टम के जरिये पेमेंट करने के लिए सिर्फ आधार नंबर और बैंक चुनने की जरूरत होगी।

सरकारी पेमेंट एप्लिकेशन भीम को मिल रहे बढ़िया रिस्पांस से उत्साहित सरकार आधार पे सिस्टम को जल्द से जल्द लागू करना चाहती है। सीएनबीसी-आवाज़ को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक आधार पे सिस्टम को अलग से नहीं बल्कि भीम के प्लेटफॉर्म पर ही इस महीने के आखिर तक लॉन्च किया जाएगा।

जब डिजिटल कैशलैस के लिए भीमऐप है तो गांधी को हटाकर अंबेडकर की तस्वीर लगाकर संघ परिवार को बहुजनों का सफाया करने से कौन रोकेगा?

बहुजनों को केसरिया फौज बनाने के लिए जैसे कैशलैस डिजिटल इंडिया में भीमऐप लांच किया गया है,वैसे ही बहुत संभव है कि जब गांधी के नाम वोट बैंक या चुनावी समीकरण में कुछ भी बनता बिगड़ता नहीं है तो भीम ऐप के बाद शायद नोट पर गांधी को हटाकर मोदी के बजाय बाबासाहेब की तस्वीर लगा दी जाये।

बाबासाहेब के मंदिर भी बन रहे हैं।बाबासाहेब गांधी के बदले नोट पर छप भी जाये तो गांधी और अशोकचक्र से छेड़छाड़ का मतलब भारतीय संविधान के बदले मनुस्मृति विधान लागू करने का आरएसएस का एजंडा ग्लोबल कारपोरट हिंदुत्व का है।राजनीतिक विरासत की इस लड़ाई पर नजर डालें तो नेहरू, इंदिरा की विरासत को दरकिनार करने की कोशिश नजर आती है। मोदी सरकार ने अपनी इस निति के तहत आंबेडकर पर जोरशोर से कार्यक्रम किए। वल्लभ भाई पटेल की याद में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की योजना है। बीजेपी का जेपी की जयंती बड़े पैमाने पर मनाने फैसला है। नेहरू संग्रहालय की काया-पलट करने की योजना है।

बंगाल में भी बहुजनों का केसरिया हिस्सा इस उम्मीद में है कि यूपी जीतने के बाद नोटों से गांधी हट जायेंगे और वहां बाबासाहेब विराजमान होंगे।बहुजनों को गांधी से वैसे ही एलर्जी है जैसे वामपक्ष को अंबेडकर से अलर्जी रही है।

बंगाल में बहुजनों के दिमाग को दही बनाने के लिए मोहन भागवत पधारे हैं।

गांधी के बदले नोट पर अंबेडकर छापने की बात को अबतक हम मजाक समझ रहे थे।यूपी में यह ख्वाब चालू है या नहीं,हम नहीं जानते।मगर हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा नेता अनिल विज के बयान से साफ जाहिर है कि नोट से गांधी की तस्वीर हटने ही वाली है,चाहे नई तस्वीर मोदी की हो या अंबेडकर की।

अंबेडकर की तस्वीर लगती है तो बहुजन वोटबैंक का बड़ा हिस्सा एक झटके से केसरिया हो जाने वाला है।संघ सरकार के मंत्री यूं ही कोई शगूफा छोड़ते नहीं है।

हर शगूफा का एक मकसद होता है।मोदी की तस्वीर लगे या न लगे,साफ है कि करेंसी से गांधी हटेंगे और उसके बाद अशोकचक्र भी खारिज होगा।फिर हिंदू राष्ट्र के लिए सबसे बड़े सरदर्द भारत के संविधान का हिसाब किताब बराबर किया जाना है।जिसके लिए संघ परिवार ने नोटबंदी का गेमचेंजर चलाया हुआ  है और तुरुप का पत्ता समाजवादी सत्ता विमर्श है।

महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने एकदम सही कहा है कि भ्रष्ट नेता गलत कामों में जिस तरह से रुपयों का इस्तेमाल करते हैं उससे तो अच्छा ही है कि अगर नोटों से बापू की तस्वीर हटा दी जाए।उनकी यह टिप्पणी हरियाणा के उन्हीं स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा नेता अनिल विज उस विवादित बयान पर आई है, जिसमें उन्होंने आज कहा है कि जब से महात्मा गांधी की फोटो नोट पर लगी है, तब से नोट की कीमत गिरनी शुरू हो गई।

गौरतलब है कि विज ने अपने बयान में कहा कि महात्मा गांधी का नाम खादी से जुड़ने के कारण इसकी दुर्गति हुई। खादी के बाद अब धीरे-धीरे नोटों से भी गांधी जी की तस्वीर हट जाएगी।उन्होंने मोदी को गांधी से बड़ा ब्रांड बताते हुए खादी से हटाने के बाद नोट से बी गांधी को हटाकर मोदी की तस्वीर लगाने की बात भी कह दी है। विज ने कहा है कि खादी के बाद अब धीरे-धीरे नोटों पर से भी गांधी जी की तस्वीर हटाई जाएगी। उन्होंने कहा कि गांधी जी के चलते रूपये की कीमत गिर रही है। साथ ही विज ने कहा कि गांधी के नाम से खादी पेटेंट नहीं है बल्कि खादी के साथ गांधी का नाम जुड़ने से खादी डूब गई है। वहीं उन्होंने कहा है कि खादी के लिए पीएम मोदी ज्यादा बड़े ब्रैंड एंबेसडर हैं।हालांकि उनके बयान से भाजपा ने किनारा कर लिया है और उसे उनका व्यक्तिगत बयान करार दिया। विवाद बढ़ता देख विज ने अपना बयान वापस ले लिया।

मीडिया केमुताबिक खादी ग्रामोद्योग के कैलेंडर में महात्मा गांधी की जगह पीएम मोदी की तस्वीर लगाने पर केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने सफाई दी है। कलराज मिश्र ने कहा है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि केलेंडर में पीएम का फोटो कैसे लगी। गांधी की बराबरी कोई नहीं कर सकता। इधर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है कि मोदी की तस्वीर को लेकर बेकार का विवाद पैदा किया जा रहा है। बीजेपी की सफाई है कि कैलेंडर पर गांधी की तस्वीर 7 बार पहले भी नहीं छपी है। पीएम मोदी ने खादी को बढ़ावा दिया है। पीएम ने खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन का नारा दिया। यूपीए के दौर में खादी की बिक्री में औसतन 5 फीसदी बढ़ी जबकि मोदी सरकार आने के बाद बिक्री 35 फीसदी बढ़ी है। मोदी सरकार गांधी दर्शन को घर-घर पहुंचा रही है।

इससे पहले तुषार गांधी ने खादी ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के डायरी-कैलेंडर विवाद के बीच शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट कर कहा, "प्रधानमंत्री पॉलीवस्त्रों के प्रतीक हैं जबकि बापू ने अपने बकिंघम पैलेस के दौरे के दौरान खादी पहनी थी न कि 10 लाख रुपये का सूट।"

उन्होंने केवीआईसी को बंद करने की मांग करते हुए कहा, "हाथ में चरखा, दिल में नाथूराम। टीवी पर ईंट का जवाब पत्थर से देने में कोई बुराई नहीं है।"

तुषार गांधी अपने ट्वीट में बापू की 1931 की ब्रिटेन यात्रा का हवाला दे रहे थे जब उन्होंने ब्रिटेन के सम्राट जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी से मुलाकात की थी उन्होंने खादी की धोती और शॉल पहन रखा था।मोदी ने इसकी तुलना में भारत में राष्ट्रपति बराक ओबामा की यात्रा के दौरान विवादास्पद 10 लाख रुपये का सूट पहना था।

तुषार ने इससे पहले ट्वीट कर कहा था, "तेरा चरखा ले गया चोर, सुन ले ये पैगाम, मेरी चिट्ठी तेरे नाम। पहले, 200 रुपये के नोट पर बापू की तस्वीर गायब हो गई, अब वह केवीआईसी की डायरी और कैलेंडर से नदारद हैं। उनकी जगह 10 लाख रुपये का सूट पहनने वाले प्यारे प्रधानमंत्री की तस्वीर लगी है।"

गौरतलब है कि केवीआईसी के 2017 के डायरी और कैलेंडर पर गांधी की जगह मोदी की तस्वीर छापे जाने पर सरकार और केवीआईसी को तमाम राजनीतिक दलों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

हम नोटबंदी के बाद भुखमरी,बेरोजगारी और मंदी के खतरों से आपको लगातार आगाह करते रहे हैं।संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आई.एल.ओ.) ने भी बेरोजगारी बढ़ने का अंदेशा जता दिया है।अर्थव्यवस्था और उत्पादन प्रणाली को हिंदुत्व के ग्लोबल एजंडे और मनुस्मृति संविधान के लिए जिस तरह दांव पर लगाया गया है,रोजगार खोकर भारत की जनता को उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

2017-2018 के बीच भारत में बेरोजगारी में मामूली इजाफा हो सकता है और रोजगार सृजन में बाधा आने के संकेत हैं। संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आई.एल.ओ.) ने 2017 में वैश्विक रोजगार एवं सामाजिक दृष्टिकोण पर गुरुवार को अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार रोजगार जरूरतों के कारण आर्थिक विकास पिछड़ता प्रतीत हो रहा है और इसमें पूरे 2017 के दौरान बेरोजगारी बढऩे तथा सामाजिक असमानता की स्थिति के और बिगड़ने की आशंका जताई गई है। वर्ष 2017 और 2018 में भारत में रोजगार सृजन की गतिविधियों के गति पकडऩे की संभावना नहीं है क्योंकि इस दौरान धीरे-धीरे बेरोजगारी बढ़ेगी और प्रतिशत के संदर्भ में इसमें गतिहीनता दिखाई देगी।

भारतीय पेशेवरों को लगेगा झटका

अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की इमिग्रेशन पॉलिसी में बदलाव के संकेत का असर उनका टर्म शुरू होने के पहले दिन से ही दिखने वाला है। इससे सबसे ज्यादा झटका अमरीका में जॉब्स की मंशा रखने वाले भारतीयों को लगेगा। ट्रम्प 20 जनवरी को अमरीका के राष्ट्रपति का पद संभालेंगे। ट्रम्प ने एच1बी वीजा के नियमों को कड़ा करने की पैरवी करने वाले जेफसेसंस को अटॉर्नी जनरल की पोस्ट के लिए चुना है। ट्रम्प के शपथ ग्रहण करने से पहले 2 अमरीकी सांसदों ने एक बिल पेश किया है जिसमें वीजा प्रोग्राम में बदलाव की मांग की है। इस बिल में कुछ ऐसे प्रस्ताव हैं जिनका सीधा असर इंडियन वर्कर्स पर हो सकता है। अमरीकी सांसदों द्वारा पेश किए गए बिल 'प्रोटैक्ट एंड ग्रो अमरीकन जॉब्स एक्ट' में एच1बी वीजा के लिए एलिजिबिलिटी में कुछ बदलाव का प्रस्ताव है।

बिल में क्या बदलाव होने हैं

ह्यबिल में एच1बी एप्लीकेशन के लिए मास्टर डिग्री में छूट को हटाने की मांग की गई है। इससे मास्टर या इसी जैसी दूसरी डिग्री होने पर एडीशनल पेपरवर्क से राहत मिलेगी। अमरीका जाने वाले ज्यादातर आई.टी. प्रोफैशनल्स के पास मास्टर डिग्री होती है। ह्य50 इम्प्लाइज से ज्यादा वाली कम्पनियों में अगर 50 प्रतिशत एच1बी या एल1 वीजा वाले हैं तो ऐसी कम्पनियों को ज्यादा हायरिंग से रोका जाए। एच1बी वीजा की मिनिमम सैलरी एक लाख डॉलर सालाना होनी चाहिए। अभी यह 60,000 डॉलर सालाना है। एच1बी वीजा वर्कर के लिए मिनिमम सैलरी 1 लाख डॉलर सालाना करने से अमरीका में कम्पनियां भारतीय आई.टी. प्रोफैशनल्स की हायरिंग कम करेंगी। इनकी जगह वे अमरीकी वर्कर्स को ही तरजीह देंगी।भारतीयों पर पड़ेगा असरह्य85,000 से ज्यादा एच1बी वीजा सालाना जारी करता है अमरीका70 से 75 हजार ऐसे वीजा भारतीय आई.टी. पेशेवरों को मिलते हैंह्य1 लाख डॉलर के सालाना वेतन की अनिवार्यता की विदेशी कर्मियों के लिए।

2017 में बेरोजगारों की संख्या 1.78 करोड़ रहेगी

रिपोर्ट के अनुसार आशंका है कि पिछले साल के 1.77 करोड़ बेरोजगारों की तुलना में 2017 में भारत में बेरोजगारों की संख्या 1.78 करोड़ और उसके अगले साल 1.8 करोड़ हो सकती है। प्रतिशत के संदर्भ में 2017-18 में बेरोजगारी दर 3.4 प्रतिशत बनी रहेगी। वर्ष 2016 में रोजगार सृजन के संदर्भ में भारत का प्रदर्शन थोड़ा अच्छा था।  रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया कि 2016 में भारत की 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर ने पिछले साल दक्षिण एशिया के लिए 6.8 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करने में मदद की है। रिपोर्ट के अनुसार विनिर्माण विकास ने भारत के हालिया आर्थिक प्रदर्शन को आधार मुहैया कराया है।

वैश्विक श्रम बल में लगातार बढ़ौत्तरी

वैश्विक बेरोजगारी दर और स्तर अल्पकालिक तौर पर उच्च बने रह सकते हैं क्योंकि वैश्विक श्रम बल में लगातार बढ़ौतरी हो रही है। विशेषकर वैश्विक बेरोजगारी दर में 2016 के 5.7 प्रतिशत की तुलना में 2017 में 5.8 प्रतिशत की मामूली बढ़त की संभावना है। आई.एल.ओ. के महानिदेशक गाइ राइडर ने कहा कि इस वक्त हम वैश्विक  अर्थव्यवस्था के कारण उत्पन्न क्षति एवं सामाजिक संकट में सुधार लाने और हर साल श्रम बाजार में आने वाले लाखों नव आगंतुकों के लिए गुणवत्तापूर्ण नौकरियों के निर्माण की दोहरी चुनौती का सामना कर रहे हैं। आई.एल.ओ. के वरिष्ठ अर्थशास्त्री और रिपोर्ट के मुख्य लेखक स्टीवेन टॉबिन ने कहा कि उभरते देशों में हर 2 श्रमिकों में से एक जबकि विकासशील देशों में हर 5 में से 4 श्रमिकों को रोजगार की बेहतर स्थितियों की आवश्यकता है। इसके अलावा विकसित देशों में बेरोजगारी में भी गिरावट आने की संभावना है और यह दर 2016 के 6.3 प्रतिशत से घटकर 6.2 प्रतिशत तक हो जाने की संभावना है।


Friday, January 13, 2017

महत्वपूर्ण खबरें और आलेख आ गए अच्छे दिन, खादी उद्योग के कैलेंडर व डायरी से गांधीजी गायब, मोदी विराजमान


Recent Posts


हस्तक्षेप के संचालन में छोटी राशि से सहयोग दें


--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!